Thursday, June 18, 2026
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राजस्थान में डोटासरा ही रहेंगे कांग्रेस अध्यक्ष या बदलाव होगा? यहां जानिए जवाब

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राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पद को लेकर बदलाव की अटकलें तेज हैं. पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा जुलाई 2020 से पद पर हैं. अब लगभग छह वर्ष पूरे हो जाएंगे. आमतौर पर कांग्रेस में यह पद तीन वर्ष के लिए होता है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक जरूरतों और उनकी उपलब्धियों के चलते उन्हें लगातार विस्तार मिलता रहा है. ऐसें में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.

सड़क से लेकर सदन तक सक्रियता
उनके कार्यकाल के दौरान संगठन काफी मजबूत हुआ. डोटासरा ने बूथ, मंडल और ब्लॉक स्तर तक संगठन को सक्रिय किया. फिलहाल, कांग्रेस में आक्रामक विपक्ष की भूमिका के रूप में भी देखा जाता है. इसका असर सड़क से लेकर सदन के भीतर भी दिख रहा है.

पीसीसी चीफ के लिए पायलट को भी दावेदार माना जाता है.
अहम बात यह भी है कि सचिन पायलट गुट की ओर से भी पीसीसी चीफ के पद के लिए लॉबिंग नहीं की जा रही है. पार्टी के भीतर इस इस तरह की सभी चर्चाओं को निराधार बताया जा रहा है. जानकार मानते हैं कि कांग्रेस इस समय ‘चेंज नहीं, कंटिन्यूटी’ की नीति पर आगे बढ़ रही है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि पार्टी पहले ही संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित कर चुकी है. अब उसे चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में किसी भी प्रकार का नेतृत्व परिवर्तन चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकता है.

पंचायत-निकाय चुनाव पर पार्टी का फोकस
राहुल गांधी के पुष्कर दौरे के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की सार्वजनिक रूप से सराहना भी की गई थी. राजनीतिक हलकों में यह भी माना जाता है कि ओबीसी वर्ग में कांग्रेस की पकड़ बनाए रखने में डोटासरा की भूमिका अहम रही है, जिसका असर चुनावी राजनीति में भी दिखाई देता रहा है. कुल मिलाकर संकेत यही हैं कि राजस्थान कांग्रेस में फिलहाल किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव की संभावना नहीं है. पार्टी का पूरा फोकस मौजूदा नेतृत्व के साथ ही आगामी पंचायत, निकाय और लोकसभा चुनावों की रणनीति को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है.

कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन का एजेंडा नहीं
सूत्रों के अनुसार, इस समय न तो दिल्ली स्तर पर इस विषय में कोई बैठक हुई है और न ही संगठनात्मक बदलाव को लेकर किसी प्रकार की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है. पार्टी का स्पष्ट संकेत है कि फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन एजेंडे में नहीं है और संगठन मौजूदा ढांचे के साथ ही आगे बढ़ रहा है.

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