Thursday, June 18, 2026
HealthViral

​​ये 3 साइलेंट बीमारियां बनती हैं हार्ट अटैक की सबसे बड़ी वजह, हार्ट सर्जन ने बताया

Featured Image

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में आज भी दिल की बीमारी मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है. कई लोगों को लगता है कि दिल की बीमारी अचानक होती है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह परेशानी शरीर के भीतर धीरे-धीरे पनपती है. 25 साल का अनुभव रखने वाले मशहूर हार्ट सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर उन तीन बड़ी कमियों के बारे में बताया है जो ज्यादातर दिल के दौरों और मौतों के लिए जिम्मेदार होती हैं.

डॉ. जेरेमी के मुताबिक दिल की बीमारियां भले ही सैकड़ों तरह की हों, लेकिन सबसे खतरनाक मामले इन तीन कैटेगरीज में ही आते हैं.

आर्टरीज का बंद होना

इसे डॉ. जेरेमी लंदन ‘प्लंबिंग प्रॉब्लम’ कहते हैं. इसमें दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों के अंदर धीरे-धीरे फैट, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम जमा होने लगता है. इससे नसें सिकुड़ जाती हैं और दिल तक ऑक्सीजन और पोषण ठीक से नहीं पहुंच पाता. मेडिकल भाषा में इसे एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवास्कुलर डिजीज कहते हैं. अगर इसका इलाज न हो, तो सीने में दर्द या हार्ट अटैक आ सकता है. डॉक्टर ‘कार्डियक कैथेटराइजेशन’ टेस्ट के जरिए इस ब्लॉकेज का पता लगाते हैं.

हार्ट वॉल्व की खराबी

डॉ. जेरेमी ने बताया कि दिल के अंदर कुछ वॉल्व होते हैं जो खून को सही दिशा में आगे भेजने का काम करते हैं. कई बार ये वॉल्व सख्त, संकरे या लीक होने लगते हैं. एक आम बीमारी है ‘एओर्टिक स्टेनोसिस’ जिसमें वॉल्व कड़ा हो जाता है और ठीक से खुल नहीं पाता. इससे दिल को खून पंप करने में बहुत ताकत लगानी पड़ती है. डॉक्टर इसे स्टेथस्कोप से दिल की धड़कन सुनकर भी भांप सकते हैं. वहीं इसकी पुष्टि के लिए ‘इको’ टेस्ट किया जाता है.

धड़कन की गड़बड़ी

डॉक्टर ने बताया कि हमारा दिल एक नेचुरल इलेक्ट्रिकल सिस्टम से चलता है जो इसकी धड़कन की रफ्तार को तय करता है. जब इस सिस्टम में खराबी आती है तो दिल बहुत तेज, बहुत धीमे या अनियमित रूप से धड़कने लगता है. इसे ‘एट्रियल फिब्रिलेशन’ कहते हैं. इसमें दिल के ऊपरी हिस्से में अजीब सी फड़फड़ाहट महसूस होती है जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टर इसके लिए ईसीजी या हार्ट मॉनिटर की मदद लेते हैं.

डॉ. जेरेमी लंदन कहते हैं कि इन दिक्कतों को समझकर लोग डरने के बजाय समय पर सही कदम उठा सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया की जानकारी कभी भी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं हो सकती इसलिए कोई भी लक्षण दिखने पर सीधे डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे बेहतर ऑप्शन रहता है.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply