Friday, June 19, 2026
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​​किडनियां कभी परास्त नहीं कर सकती, प्रेमानंद महाराज की यात्रा पर लगा ब्रेक; भक्त हुए चिंतित

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मथुरा: वृंदावन के प्रसिद्द संत प्रेमानंद महाराज से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. उनके केली कुंज आश्रम के सेवादारों ने आधिकारिक रूप से यह घोषणा की है कि महाराज जी की दैनिक पदयात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है. इस सूचना के सार्वजनिक होने के बाद से ही उनके अनुयायियों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है और वो लगातार महाराज जी के उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.

आश्रम प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रेमानंद महाराज की केली कुंज से लेकर सौभरी कुंड तक होने वाली नियमित पदयात्रा को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है. इसके साथ ही, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आयोजित होने वाली आमने-सामने की दैनिक वार्ता भी अग्रिम आदेश तक बंद रहेगी. इस आकस्मिक फैसले के पीछे महाराज जी के स्वास्थ्य संबंधी कारणों को मुख्य वजह माना जा रहा है.

20 वर्षों से खराब हैं प्रेमानंद महाराज की किडनियां

प्रेमानंद महाराज स्वयं अपने सत्संग और प्रवचनों में कई बार इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि उनकी दोनों किडनियां पिछले करीब 20 वर्षों से पूरी तरह खराब हैं. वे लंबे समय से नियमित डायलिसिस पर चल रहे हैं. यही कारण है कि जब भी उनकी दिनचर्या या पदयात्रा में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव होता है, तो उनके लाखों भक्तों का दिल बैठ जाता है और वे उदास हो जाते हैं.

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अंगदान का प्रस्ताव दे चुके हैं मनिंदरजीत सिंह बिट्टा

इसी बीच सोशल मीडिया पर ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा और महाराज जी की बातचीत का एक पुराना वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस मुलाकात के दौरान एमएस बिट्टा ने बेहद भावुक होकर रोते हुए महाराज जी से अपनी किडनी स्वीकार करने की विनम्र प्रार्थना की थी. उन्होंने कहा था कि वे अपनी स्वस्थ किडनी राधा रानी की कृपा समझकर महाराज जी को भेंट स्वरूप देना चाहते हैं.

एमएस बिट्टा के इस बेहद भावुक प्रस्ताव को सुनकर प्रेमानंद महाराज ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा कि वे पूरी तरह से भागवती शक्ति से संपन्न हैं. उन्होंने कहा कि ये किडनियां उन्हें कभी परास्त नहीं कर सकती हैं और जिस दिन उनकी अंतिम सांस होगी, यह शरीर केवल उसी दिन विश्राम लेगा. महाराज जी ने बिट्टा के इस सेवा भाव की सराहना की लेकिन अंग लेने से पूरी तरह इंकार कर दिया.

संत प्रेमानंद महाराज ने अपने दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में यह अटल नियम लिया है कि वे अपने इस नश्वर शरीर में किसी अन्य व्यक्ति के खून की एक बूंद भी कभी स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि 20 साल से किडनी खराब होने और निरंतर डायलिसिस पर रहने के बाद भी यदि वे इतनी ऊर्जा के साथ बोल पा रहे हैं, तो यह केवल बांके बिहारी जी की असीम अनुकंपा है.

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